महावीर करो
कल्याण किसी पर भी आस नहीं बस तू ही है
सहारा जग से अब मैं हार गया अब ढूंढ रहा
किनारा थक हार के बैठा हूं पर मिलती नहीं
है मंजिल मंजिल का मैं क्या करूं मेरा राम
में लगता दिल परेशान हूं बेचैन सा हर शाम
दर पे आता मैं भगवा रंग तन पे डाले अपना
शीश झुकाता मैं राम नाम की बार-बार जय
जयकार लगाता हूं मन में तेरा नाम लेकर हर
काम चलाता हूं बिगड़ा हर वो काम बने तेरा
नाम लेके करता हूं मेरे गीत से मेरा नाम
बने तुझे याद करके लिखता हूं बजरंगी है
नाम तुम्हारा राम तुम्हारे सीने में कृपा
करना काम तुम्हारा तभी मजा है जीने में
भक्ति में हूं लीन तुम्हारे दिल के अपने
पास रखो संकट में है भक्त तुम्हारा भक्तों
की तुम लाज रखो हल करो प्रभु अब तो ये
पीड़ा रोज सहता हूं कष्टों से परेशान
इसलिए बार-बार मैं कहता हूं कष्टों से
परेशान इसलिए बार-बार मैं कहता हूं हे जगव
